Skip to main content

पुदुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी और विधायक के बीच

केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल किरण बेदी और  के विधायक ए अंबालगन के बीच मंच पर ही तीखी झड़प हो गई. घटना उस समय हुई, जब विधायक भाषण दे रहे थे. वायरल हुए वीडियो के मुताबिक उपराज्यपाल किरण बेदी मंच के सामने खड़े होकर विधायक के सामने हाथ जोड़कर कहतीं हैं-प्लीज गो, इस पर विधायक ने गुस्से में उनकी तरह हाथ कर कहा-प्लीज गो. दोनों शख्सियतों के बीच यह झड़प देखकर जहां मंच पर मौजूद लोग हैरान रहे, वहीं सभागार में कु पहले भी कई बार पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी विवादों में घिर चुकीं हैं.

 मुख्यमंत्री वी नारायणसामी द्वारा उन्हें लिखे गए पत्र को ‘बेहद अशिष्ट’ बता चुकी हैं. इस पत्र में मुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल पर आरोप लगाया था कि वह आधिकारिक जानकारियों का ‘खुलासा’ सोशल मीडिया पर करती हैं. बेदी ने संवाददाताओं को भेजे गए अपने वाट्सएप्प संदेश में कहा कि नारायणसामी ने जो पत्र मीडिया में जारी किए हैं, अगर यह वही पत्र है जो उन्होंने उप राज्यपाल को लिखा था तो मैं यह सूचित करना चाहती हूं कि यह मूल पत्र मुख्यमंत्री को वापस भेज दिया गया है क्योंकि इसे किसी संवैधानिक पद पर बैठे शख्स को लिखा गया अशिष्ट पत्र माना गया है.छ लोगों ने ठहाके भी लगाए. इस बीच जब मंच पर मौजूद एक व्यक्ति ने बीच-बचाव और समझाने की कोशिश की तो विधायक ने हाथ झटक दिया.
बेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी कई ‘अशिष्ट’ पत्र लिखे हैं और अब तो इस तरह का पत्र लिखना एक अभ्यास ही बन गया है. उन्होंने कहा कि मैं आशा करती हूं कि मुख्यमंत्री यह महसूस करेंगे कि इस तरह का पत्र मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों की शोभा नहीं बढ़ाता है. नारायणसामी द्वारा 10 अगस्त को बेदी को लिखे गए पत्र में कहा गया था. बेदी को बिना संबंधित मंत्री के अधिकारियों को आदेश जारी करने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है. गौरतलब है कि किरण बेदी पहले भी अपने कई बयानों की वजह से विवादों में रह चुकी है.नई दिल्ली : साल 1965. भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध खत्म हुए अभी कुछ दिन बीते थे. नया साल शुरू हुआ. यूं तो राजधानी दिल्ली में ठंडक सबाब पर थी, लेकिन भारत-पाक की सीमा पर बारूद की गंध और गोलियों की गर्माहट अभी भी महसूस की जा सकती थी. इन सबके बीच दोनों देशों के बीच बातचीत की रूपरेखा बनी और इसके लिए जो जगह तय की गई वह न तो भारत में थी और न ही पाकिस्तान में. तत्कालीन सोवियत रूस के अंतर्गत आने वाले 'ताशकंद' में 10 जनवरी 1966 को भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (    ) और पड़ोसी पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच बातचीत मुकर्रर हुई. 
 
10 जनवरी 1966 की उस सुबह 'ताशकंद' में ठंडक कुछ ज्यादा ही थी. यूं भी कह सकते हैं कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल को ऐसी ठंडक झेलने की आदत नहीं थी, इसलिये उनकी दुश्वारी कुछ ज्यादा ही थी. मुलाकात का वक्त पहले से तय था. लाल बहादुर शास्त्री उस दिन ताशकंद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर इस घटना का जिक्र अपनी आत्मकथा 'बियॉन्ड द लाइंस (  )' में करते हुए लिखते हैं, ''आधी रात के बाद अचानक मेरे कमरे की घंटी बजी. दरवाजे पर एक महिला खड़ी थी. उसने कहा कि आपके प्रधानमंत्री की हालत गंभीर है. मैं करीबन भागते हुए उनके कमरे में पहुंचा, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. कमरे में खड़े एक शख़्स ने इशारा से बताया कि पीएम की मौत हो चुकी है''. उस ऐतिहासिक समझौते के कुछ घंटों बाद ही भारत के लिए सब कुछ बदल गया. विदेशी धरती पर संदिग्ध परिस्थितियों में भारतीय पीएम की मौत से सन्नाटा छा गया. लोग दुखी तो थे ही, लेकिन उससे कहीं ज्यादा हैरान थे.  और अयूब खान तय वक्त पर मिले. बातचीत काफी लंबी चली और दोनों देशों के बीच शांति समझौता भी हो गया. ऐसे में दोनों मुल्कों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधिमंडल में शामिल अधिकारियों का खु़श होना लाजिमी था, लेकिन वह रात भारत पर भारी पड़ी. 10-11 जनवरी की दरम्यानी रात प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की संदिग्ध परिस्थितों में मौत हो गई. 
 लाल बहादुर शास्त्री ( ) की मौत के बाद तमाम सवाल खड़े. उनकी मौत के पीछे साजिश की बात भी कही गई. खासकर जब शास्त्री जी की मौत के दो अहम गवाहों, उनके निजी चिकित्सक आर एन चुग और घरेलू सहायक राम नाथ की सड़क दुर्घटनाओं में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई तो यह रहस्य और गहरा गया. लाल बहादुर शास्त्री की मौत के एक दशक बाद 1977 में सरकार ने उनकी मौत की जांच के लिए राज नारायण समिति का गठन किया. इस समिति ने तमाम पहलुओं पर अपनी जांच की, लेकिन आज तक इस समिति की रिपोर्ट का अता-पता नहीं है. यहां तक कि राज्यसभा के पास भी इस समिति की रिपोर्ट की कोई कॉपी नहीं है. 

 सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''संसद बहुत सावधानी से दस्तावेजों को सहेजने के लिए जानी जाती है. संसद में कहा गया हर शब्द रिकार्ड और सार्वजनिक दायरे में रखा जाता है, एक ऐसा भारी-भरकम काम है जिसे कार्यालय बिल्कुल सही तरह से कर रहा है. तब ऐसा महत्वपूर्ण रिकार्ड कैसे गायब हो गया''. उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री की मौत से जुड़े तमाम गोपनीय रिकार्ड प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के सामने रखने के निर्देश भी दिये हैं, इसे सार्वजनिक करने के संबंध में निर्णय लें. 

Comments

Popular posts from this blog

ولايات أمريكية تقاضي إدارة دونالد ترامب بسبب قرار إعلان الطوارئ

رفعت 16 ولاية أمريكية دعوى قضائية ضد إدارة الرئيس دونالد ترامب بسبب قراره إعلان حالة طوارئ وطنية بغية الحصول على التمويل اللاز م لبناء جدار على الحدود مع المكسيك . وجاء ذلك بعد أيام قليل ة على تفعيل ترامب سلطاته الخاص ة بإعلان الطوارئ لتجاوز الكونغرس، وتأمين التمويل اللازم للمشروع ال مثير للجدل . وتعهد الديمقراطيون بالطعن ضد هذه الخطوة باستخدام كافة الوسائل المتاحة . وقال خافيير شافيير، المحامي العام بولاية كاليفور نيا، إن هذه الولايات قررت رفع دعوى قضائية ضد ترامب "لإثنائه عن سوء استغلال سلطاته الرئاسية". وأضاف: "نقاضي الرئيس ترامب لمنعه من سرقة أحادية الجانب لأموال دافعي الضرائب التي خصصها الكونغرس بصورة قانونية لصالح مواطني ولاياتنا . وبالنسبة لأغلبنا، نرى أن المكتب الرئاسي ليس المكان المناسب لأداء مسرحيات". وتطالب الدعوى القضائية بإصدار أمر قضائي أولي يوقف إع لان الطوارئ أثناء استمرار المعركة القضائية، وفقا لتقرير نشرته صحيف ة واشنطن بوست . وقرر ترامب إعلان الطوارئ بعد أن رفض الكونغرس منح إدارته تمويلا لبناء الجدار الحدودي. وكانت الدعوى ...

जब बंदर, सांप उड़ेंगे और इंसान भी बदल जाएगा

ये बात तो हम सभी जानते हैं कि इंसान के पुरखे बंदर थे. कभी हमारे पूर्व जों की पूंछ हुआ करती थी जो इंसान के क्रमागत विकास में धीरे-धीरे लुप्त होती चली गई. जैसे-जैसे इंसानी शरीर का विकास हो ता गया, उसका रूप बदलता चला गया. श रीर के जिन अंगों की ज़रूरत नहीं थी, वो अपने आप ही ख़त्म होते चले गए. जैसे कि इंसान के शरीर में अपेंडिक्स का अब कोई रोल नहीं है. लिहाज़ा इसका आकार समय के साथ कम होता जा रहा है. हो सकता है कुछ सदियों बाद ये पूरी तरह ख़त्म हो जाए. असल में प्रकृति के विकास का पहिया हमेशा घूमता रहता है. इंसान की पैदाइश इसी का नतीजा है. सारे ही जीव प्राकृ तिक विकास के नतीजे में पैदा हुए हैं. तो, अब ये मान लेना ग़लत होगा कि क्रमिक विकास का चक्र अब नहीं चल रहा है. इंसान भी इस प्रक्रिया से गुज़र रहा है. आगे चलकर इंसान के रंग-रूप में हमें और बदलाव देखने को मिल सकते हैं नई रिसर्च तो यहाँ तक कहती हैं कि आने वाले समय में पूरी कायनात में ऐसे परिवर्तन होंगे कि धरती पर रहने वाला कोई भी जीव आज जैसा नज़र नहीं आएगा. वर्ष 1980 में लेखक डुगल डिक् सन ने एक किताब लिखी थी, आफ़्टर मैन: ए ज़्य...

كيف يمكن أن تساعد الدهون البنية في إنقاص الوزن؟

واعتاد العلماء على الاعتقاد بأن الدهون البنية تختفي أو تتوقف عن العمل عند بلوغنا سن الرشد، إذ أن أجسامنا تطور طرقاً أخرى لتنظيم درجة الحرارة، كالارتعاش مثلاً. لكن الأبحاث الحديثة كشفت أن البالغين لا يزالون يمتلكون كميات صغيرة من الأنسجة الدهنية البنية الفاعلة، وخاصة حول منطقتي الرقبة والكتف. نيا وبدأ يرسم خططاً لمستقبلهما معاً، لكن تونيا لم تكن تبادله الحب، بل كانت مجرد محتالة. يقول توماس: "كان هناك الكثير من القواسم المشتركة الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع بيننا، كنا نتحدث يومياً على مدى سبعة أشهر. كانت جميلة ومرحة ولطيفة". ويضيف: "عندما أنظر إلى الوراء الآن، لا أستطيع أن أصدق كيف تمكنت من ا الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع ستغلالي بهذه السهولة، فلم يخطر ببالي أنها كانت تستدرجني لإعطائها بيانا الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع ت حسابي المصرفي لتتمكن من الحصول على المال". هذه القضية ليست الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع مجرد ابتزاز عاطفي راح ضحيتها شاب عاشق، بل إنها تحمل كل علامات عمليات الاحتيال. ويلجأ العديد من المحتالين إلى استخدام موا...