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Showing posts from September, 2019

जब बंदर, सांप उड़ेंगे और इंसान भी बदल जाएगा

ये बात तो हम सभी जानते हैं कि इंसान के पुरखे बंदर थे. कभी हमारे पूर्व जों की पूंछ हुआ करती थी जो इंसान के क्रमागत विकास में धीरे-धीरे लुप्त होती चली गई. जैसे-जैसे इंसानी शरीर का विकास हो ता गया, उसका रूप बदलता चला गया. श रीर के जिन अंगों की ज़रूरत नहीं थी, वो अपने आप ही ख़त्म होते चले गए. जैसे कि इंसान के शरीर में अपेंडिक्स का अब कोई रोल नहीं है. लिहाज़ा इसका आकार समय के साथ कम होता जा रहा है. हो सकता है कुछ सदियों बाद ये पूरी तरह ख़त्म हो जाए. असल में प्रकृति के विकास का पहिया हमेशा घूमता रहता है. इंसान की पैदाइश इसी का नतीजा है. सारे ही जीव प्राकृ तिक विकास के नतीजे में पैदा हुए हैं. तो, अब ये मान लेना ग़लत होगा कि क्रमिक विकास का चक्र अब नहीं चल रहा है. इंसान भी इस प्रक्रिया से गुज़र रहा है. आगे चलकर इंसान के रंग-रूप में हमें और बदलाव देखने को मिल सकते हैं नई रिसर्च तो यहाँ तक कहती हैं कि आने वाले समय में पूरी कायनात में ऐसे परिवर्तन होंगे कि धरती पर रहने वाला कोई भी जीव आज जैसा नज़र नहीं आएगा. वर्ष 1980 में लेखक डुगल डिक् सन ने एक किताब लिखी थी, आफ़्टर मैन: ए ज़्य...