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Showing posts from June, 2019

इसराइल में उतार पर है नेतन्याहू का जादू?

सैबल दासगुप्ता की राय है कि हॉन्गकॉन्ग के लोग चीन के साथ आकर ख़ुश नहीं हैं लेकिन चीन दौलत के दम पर एक तबके की राय बदलने में कामयाब हो रहा है. सैबल दासगुप्ता का आकलन है, "1997 में जब से हॉन्गकॉन्ग चीन के पास आया , तब से हॉन्गकॉन्ग के लोग नाराज़ हैं. आप कभी भी हॉन्गकॉन्ग जाइये, दुकानदार या फिर किसी और से बात कीजिए, उनको बस उनका लोकतंत्र और आज़ादी चले जाने का डर है. सारे आंदोलन यही बताते हैं. लेकिन उसके साथ हुआ ये है कि चीन के व्यापारी हॉन्गकॉन्ग में इतनी ज्यादा मात्रा में पैसे डालते हैं और चीन के पर्यटक इतनी बड़ी मात्रा में ख़रीदारी करते हैं कि हॉन्गकॉन्ग के व्यापारी चीन के समर्थक होने लगे. उन्हें लगा कि लोकतंत्र जाए भाड़ में यहां कमाई हो रही है. इतनी कमाई उन्होंने सपने में भी नहीं देखी." लेकिन हॉन्गकॉन्ग में हर कोई स्वायत्तता की क़ीमत लगाने को तैयार नहीं. प्रत्यर्पण बिल के पहले भी हॉन्गकॉन्ग के लोग चीन की सख्ती पर ग़ुस्सा दिखा चुके हैं. चीन के राष्ट्र गान के प्रति असम्मान ज़ाहिर करने पर दंडित करने का क़ानून, लोकतंत्र और आज़ादी समर्थक विधायकों की सदस्यता ख़ारिज करन...